काग्रेस हाईकमान के फैसले से मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल आधा दर्जन से ज्यादा दावेदारों के हाथ मायूसी लगी। सूबे की कमान थामने के उनके मजबूत दावों को आखिरकार ठाव नहीं मिली। उनके दावों पर विरोधियों के दाव भारी पड़े। छह मार्च को चुनाव नतीजे आने के बाद काग्रेस में मुख्यमंत्री प...
Mar 13,2012(10:49:59)
सूबे में सरकार भले ही बदल गई, लेकिन सत्ता की कमान एक भाई से दूसरे भाई के हाथ में चली गई है। जी हां, नई कांग्रेसनीत सरकार के घोषित मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, निवर्तमान मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूड़ी के ममेरे भाई हैं। सूबे की सियासी जंग में भाई के सामने भाई तो होगा ही, भाजपा की रण...
Mar 13,2012(09:34:02)
टिकट बंटवारे से शुरू हुई काग्रेस की धड़ेबाजी मुख्यमंत्री के सवाल पर और ज्यादा खुलकर सामने आ गई। आलम यह रहा कि त्रिशकु जनादेश के कारण स्पष्ट बहुमत न मिलने के बावजूद जोड़-तोड़ कर सरकार बनाने की स्थिति में पहुंची काग्रेस सातवें दिन अपना नेता विधायक दल फाइनल कर पाई। ...
Mar 13,2012(08:48:11)
बसपा ने त्रिशंकु विधानसभा में सरकार बनाने के लिए समर्थन देकर मानों कांग्रेस को संजीवनी दे दी। तीन निर्दलीय विधायकों के दबाव से आजिज आई कांग्रेस को इससे बड़ी राहत तो मिली, लेकिन साथ ही यह भी सच है कि बसपा के लिए भी कांग्रेस को समर्थन देना मजबूरी बन गया था क्योंकि मायावती अगर य...
Mar 12,2012(08:06:15)
भाजपा और कांग्रेस जरा सी मेहनत और कर लेते तो शायद दोनों में से किसी एक को सत्ता सुख भोगने के लिए दूसरों की मिन्नत नहीं करनी पड़ती। पांच साल अपनी नीतियों पर सरकार को चलाने के सहज हालात मिलते सो अलग। भाजपा को नौ सीटें और कांग्रेस को सात सीटों पर बेहद मामूली अंतर से हार का मुंह दे...
Mar 12,2012(08:06:10)
सरकार बनाने को तैयार काग्रेस को समर्थन या फिर भाजपा के साथ विपक्ष में बैठने को तरजीह, बसपा अभी तक तय नहीं कर पाई है कि पार्टी को क्या स्टैंड लेना है। देहरादून में काग्रेस विधायक दल के नेता के चयन के लिए हुई बैठक और रायशुमारी के दौरान यह चर्चा जोर से फैली कि बसपा के दो विधायक का...
Mar 11,2012(08:36:30)
उत्ताराखंड में संख्या के खेल में काग्रेस से पिछड़ने के बाद भाजपा को सत्ता तो गंवानी ही पड़ी, नए नेता के चुनाव के लिए भी मशक्कत करनी पड़ रही है। मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी व कुछ मंत्रियों के हार जाने के कारण पार्टी के सामने यह समस्या खड़ी हुई है। भविष्य की राजनीति के लिए भाजपा ...
Mar 11,2012(08:25:52)
काग्रेस ने उठाए गोधरा जैसे मुद्दे
स्टेडियम के नाम पर मिली तो बस सियासत
उत्तराखंड में मुद्दों पर हावी हैं मुखौटे
राज्य में भारतीय जनता पार्टी सत्तारूढ़ है। पार्टी की कमान भगत सिंह कोश्यारी और सरकार की कमान बीसी खंडूरी के हाथ है। 2007 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 69 में से 34 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की थी। अब दोबारा सत्ता में आने के लिए संघर्षरत है। उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पहले भ्रष्टïाचार के आरोप के कारण पार्टी को रमेश पोखरियाल निशंक को मुख्यमंत्री पद से हटाना पड़ा था और राज्य की कमान पूर्व मुख्यमंत्री खंडूरी को सौंपी थी।
राज्य की सभी पांच लोकसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। पिछले विधानसभा चुनाव में हरक सिंह रावत के नेतृत्व में पार्टी 21 सीटें लेकर विपक्ष में बैठी। पार्टी इस बार सरकार विरोधी लहर का दावा कर रही है और उम्मीद कर रही है प्रदेश की जनता उसे एक बार फिर सत्ता सौंपेगी।
बहुजन समाज पार्टी दल का राज्य के मैदानी भागों में विशेष जनाधार है। 2007 के विधानसभा चुनाव 8 सीटें जीत कर पार्टी तीसरे नंबर रही। इस बार बसपा सुप्रीमो मायावती के नेतृत्व में पार्टी राज्य की सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी दावा कर रही है कि वह सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
उत्तराखंड क्रांति दल पिछले विधानसभा चुनाव में तीन सीटें जीत कर यह दल सरकार में भाजपा की सहयोगी बन गई थी। राज्य की राजनीति में दखल रखने वाली यह स्थानीय पार्टी नारायण सिंह के नेतृत्व में अगली सरकार बनाने में फिर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने को तैयार है।
खास तौर पर राज्य के मैदानी इलाकों में ही जनाधार रखने वाली समाजवादी पार्टी का पिछले विधानसभा चुनाव में खाता भी नहीं खुल पाया था, परंतु मुलायम सिंह के नेतृत्व वाली इस पार्टी का राज्य की राजनीति में खास धमक है। पार्टी कुछ सीटों पर जीत-हार को प्रभावित कर सकती है।
उत्राखंड में व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते ही भाजपा को बार-बार मुख्यमंत्री बदलना पड़ा है। और पढ़ें...
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फैसले की घड़ी जैसे-जैसे करीब आ रही है वैसे-वैसे आमने-सामने खड़े सूरमाओं की धड़कनें तेज होने लगी हैं। विधानसभा की सबसे हॉट सीटों में शुमार कोटद्वार में यही परिदृश्य है। .....